हाल ही में जब पूरे देश में हर जगह 'कोरोनावायरस' को लेकर चर्चा गर्म थी उसी बीच भारतीय राजनीति में एक ऐसा पल आता है जो सभी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. देश की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस पार्टी के एक कद्दावर नेता द्वारा इसकी सदस्यता को त्याग कर प्रमुख विपक्षी पार्टी को ज्वाइन कर लेना एक काफी बड़ी बात है.
दरअसल हाल ही में मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख नेता और कांग्रेस शासन में केंद्र सरकार में प्रमुख भूमिका निभा चुके युवा कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया.
भारतीय जनता पार्टी के लिए यह एक बेहतरीन अवसर था कांग्रेस पार्टी को यह दिखाने के लिए कि अब उसका वर्चस्व लगातार समाप्त होता जा रहा है. पार्टी ने सिंधिया का गर्मजोशी से स्वागत किया. इसके साथ ही पार्टी ज्वाइन करते ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश से बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा में पर्चा भी भर दिया है.
इसी दौरान विभिन्न पार्टियों के कई प्रमुख नेता ज्योतिरादित्य को एक स्वार्थी नेता के तौर पर स्थापित करके अपना राजनीतिक आकलन प्रस्तुत कर रहे हैं. कांग्रेस के दिग्गज नेता भी इसी का समर्थन कर रहे हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि आज का समय कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का समय है.
आखिर ऐसी क्या बात हुई कि उसका एक प्रमुख नेता अपनी ही पार्टी से इतना नाराज हो गया और पार्टी के अध्यक्ष और बड़े नेता आखिर ऐसे कौन से दांवपेच में फंसे थे कि उन्हें इनकी नाराजगी भी दिखाई नहीं दी.
ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस कदम को लेकर आप क्या राय रखते हैं कमेंट करके हमें जरूर बताएं.

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