कला चाहे किसी भी रूप में हो यह मानव भावों की अभिव्यक्ति का सदा से ही एक सफलतम माध्यम रहा है. फिर चाहे बात संगीत कला की हो नृत्य कला की हो अथवा गायन वादन कला की. कला के माध्यम से किसी देश की संस्कृति और सभ्यता का परिचय प्राप्त होता है. साथ ही यह भी पता लगता है कि यह संस्कृति कितनी समृद्ध है तथा इसके मूल्य कितने विस्तृत हैं. विभिन्न कलाओं में नृत्य कला को काफी महत्वपूर्ण माना गया है. सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर वर्तमान तक नृत्य परंपरा अविरल चलती आ रही है. प्राचीन समय में प्राप्त चाहे कांसे की नर्तकी की मूर्ति हो अथवा नृत्य रत नटराज की मूर्ति. सभी भारतीय परंपरा में नृत्य के महत्व को साकार करते हैं. आज भी भारत में कई तरह की नृत्य शैलियां विद्यमान है. यदि राजस्थान की बात करें तो राजस्थान के कालबेलिया नृत्य को तो यूनेस्को ने अपनी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में भी शामिल किया है. नृत्य/ डांस न सिर्फ आपकी भाव अभिव्यक्ति का माध्यम बनता है बल्कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना गया है. तो आइए आज इस इंटरनेशनल डांस डे डांस करते हुए मजा लीजिए.
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