ग|लियां और बदतमीजी मुझे भी आती है, मगर सब्र रखता हूँ,
सवाल परवरिश पर उठेंगे बस इसलिए चुप रहता हूँ।
हाल ही में दिल्ली पुलिस ने इंस्टाग्राम पर बॉयज लॉकर रूम (boys locker room) नाम से ग्रुप चलाने वाले लड़कों को हिरासत में लिया है. इनमें से ज्यादातर लड़के किशोरावस्था में है. इंस्टाग्राम पर लगभग 27 दोस्तों के साथ यह ग्रुप चल रहा था. जिसमें उनकी स्कूल की लड़कियों के फोटो थे और वहां पर सभी रेप और सेक्स के बारे में चर्चा करते थे. पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब इस ग्रुप के ही एक लड़के ने ग्रुप की चैट की कुछ स्क्रीनशॉट्स सोशल मिल गया पर सार्वजनिक कर दिए.
आजकल की विकसित होती युवा पीढ़ी के बीच किस तरह की मानसिकता चल रही है इसे देखकर न सिर्फ दिल्ली पुलिस बल की इस घटना को समझने वाले हर एक शख्स की रूह जरूर कांप उठी होगी.
वही दिल्ली जहां निर्भया जैसे केस सामने आते हैं, जहां रोज कितने हैं रेप केस पुलिस के सामने तक नहीं आ पाते. उसी दिल्ली में वीआईपी स्कूल में पढ़ने वाले और हर तरह के ऐसो आराम में जीने वाले बच्चों में इस तरह की सोच का विकसित होना निश्चित रूप से काफी दुर्भाग्यपूर्ण है.
जरा सोचिए इन सभी बच्चों के अभिभावक जो इनके उज्जवल भविष्य की कामना लेकर चल रहे हैं क्या वे इस बारे में कभी सोच भी सकेंगे.
अब यदि इस घटना की जिम्मेदारी देना चाहे तो आखिर किसे दे? दिन प्रतिदिन अंधाधुन रफ्तार से भागती जिंदगी जिसमें यह सोचने का भी समय नहीं है कि आखिर क्या गलत है? और क्या सही?
माता पिता के पास अपने बच्चों के लिए समय नहीं है. वही बच्चे अपने मन में उठ रहे सवालों का जवाब गूगल के अलावा किसी और से पूछना उचित नहीं समझते.
कोरोना काल के दौरान और संभवतः इसके बाद भी जब हम सब पढ़ाई लिखाई के लिए ऑनलाइन विकल्पों की और बढ़ते जा रहे हैं ऐसे में सावधानी ओर ज्यादा बढ़ जाती हैं.
आप सब इस घटना को किस तरह देखते हैं, कमेंट करके हमें जरूर अवगत कराएं🙏

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